पड़ोसी का घर जलाकर लौटे हो....

मन्दिरो-मस्जिद की बात पर रमें हो 
सियासत का नया मुद्दा मालूम होते हो।

साज़िश है तुम्हारे लहू का रंग बदलने की 
और तुम बहुत बीमार मालूम होते हो।

परिन्दो परवाज़ नफ़े नुक़सान में तोली 
कोई ज़िन्दा बारूद से मालूम होते हो।

दिलों में नफ़रत की दींवार खींच गया
वो वज़ीर, तुम पैदल मालूम होते हो।

तुम्हीं को बाँटकर, दिल्ली के सफ़र में है 
उन्ही के बस मददगार मालूम होते हो।

पड़ोसी का घर जलाकर के लौटे हो
हुक्मारानो की नयी अदा मालूम होते हो।

@विक्रम सर्वाधिकार सुरक्षित





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