The country is power hugry

हम IOT युग को जी रहे है। Connected होने की मुहर हमारे हाथ, जेब और कलाइयों में अंकित है जेब में मोबाइल, घर में Alexa, मोबाइल में Siri, google Assitant, कम्प्यूटर में Cortana, हमारी आवाज़ मात्र सुनकर काम करने को आतुर फिरते है। 

आकाशगंगा में पृथ्वी का चक्कर काटते तमाम उपग्रह अनवरत डाटा फेंक रहे है, धरती की छाती पर गढ़े तमाम cellular टावर आपके मोबाइल को अनवरत स्कैन कर रहे है, घर में wi-fi, zigbee, BLE का बड़ा network बिछा है। हाथ में बँधा बैंड आपकी क़दमताल और धड़कनो की चाल को नापता है। क़ानून के हाथों से लम्बा google आपके हर आवागमन का ख़ाका खींच देता है।
उपग्रहों की मदद से इतना सटीक दिशा-निर्देशन करता है कि घाघ से घाघ दिशा का ज्ञान रखने वाला चकरा जाये।

मोबाइल में झाँक कर अमेरिका,यूरोप घूम रहे सोशलमीडियावीर, रिश्तों के पैमानो पर भलेअलग थलग हो डावाँडोल हो, किन्तु आभासी समाजिकता में परमवीरचक्र है। कुल मिलाकर Connectivity ज़रूरत है और connectivity का ईंधन है पावर, लुटीयन दिल्ली वाली नहीं...... तारों में संचरित होती Ohm’s law वाली पॉवर।

इसी connectivity के चक्कर में पूरा देश का देश पावर का भूखा हुआ जाता है। रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डों, छोटे बड़े hotels में पावर स्टोर कर लेने की होड़ है।बच्चा या बड़ा सब के सब हम पावर plug के आसपास मँडराते पाये जाते है। मौक़ा मिलते ही पावर चूस लेने kee जुगत भिड़ाते है, पावर को क़ैद कर जेब में भर लेते है। लिथीयम के तमाम पोलिमर विघटित होकर हमारी जेब क़ैद है। कभी मोबाइल की बैटरी के तौर पर कभी पावर की जमा पूँजी पावर बैंक के रूप में। लिथीयम polymer के कान यदि थोड़ा गर्म हो जाये तो समझ लीजिए जीता जागता बम है। हथगोला, जेबगोला, जो गर हवा हुआ तो वाट आपकी ही लगायेगा। पर तमाम जाने अनजाने ख़तरे उठाते हुये भी हमारी पावर की भूख चरम की ओर है

हम कभी नदियों की धार से, कभी हवायो के बहाव से, कभी सूरज की रोशनी चूसकर पावर का जुगाड़ करते है। फिर उसे लिथीयम ion के तमाम पोलिमर के फ़ॉर्म में जमा करते है। जैसे किसी बैंक में पैसा जमा होता है।पावर जमा करने के और नये जुगाड़ की खोजबींन भी जारी है। कुल मिलाकर connected रहने की जुगत और ज़रूरत में हम पावर के भूखे है। भूख अनवरत बढ़ रही है। power requiremnt per capita इसका सबूत है। 

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