अहसास मर चुके है और रूह सो गयी है

किसी अनजान शायर की पेशकश है बजह फरमायें  ..... 

अहसास मर चुके है और रूह सो गयी है 
अफ़सोस आज दुनिया पत्थर की हो गयी है 

गाड़ी में कशमकश है सीटों के वास्ते अब 
वो पहले आप वाली तहजीब खो गयी है 

उसने नहीं उगाया अपनी तरफ से इसको 
बेवा के घर में मेहँदी बारिश से हो गयी है 

दुनिया के दौड़ में मैं फिर रह गया हूँ पीछे 
फिर मुफलिसी कदम की जंजीर हो गयी है 

 --------गुमनाम--------------
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