मुहब्बत में गिरफ्तार सा लगा...

मुहब्बत डे पर विशेष पेशकश.....

घर से अक्सर फरार सा लगा
मुहब्बत में गिरफ्तार सा लगा

मन में ख्वाब, हाथों में गुलाब
लड़का बड़ा अदबदार सा लगा

टिपटॉप हो के निकला था घर से
लौटा तो खर्च हुयी पगार सा लगा

शेरों शायरी सब सीख लिया उसने
जलेबी में सने अखबार सा लगा

रात चाँद तारों को ताकता रहा
इश्क़ का कीड़ा जोरदार सा लगा

खोल रखे है दिल के रोशनदान उसने
किसी साये का तलबगार सा लगा

दिल हार आया मुहब्बत के मैदान में
कभी खुश तो कभी बीमार सा लगा

बारहा इतराता है आईने के सामने
किसी काबिल अदाकार सा लगा


@विक्रम

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