कालजयी व्यक्तिव तुम्हारा बारदोली के सरदार...

हिन्दुस्तान के एकीकरण के थे तुम सूत्रधार
कालजयी व्यक्तिव तुम्हारा बारदोली के सरदार

त्याग धैर्य की प्रतिमूर्ति तुम संघर्ष किये अपार
कालजयी व्यक्तिव तुम्हारा बारदोली के सरदार

खेड़ा की सरजमी से आन्दोलन उदघोष किया
सोते हलधर को ललकारा भारत को नवजोश दिया
देख इरादे वल्लभभाई के जन जन था साथ हुआ
नतमस्तक था हुआ प्रसाशन हिली ब्रिटिश सरकार

कालजयी व्यक्तिव तुम्हारा बारदोली के सरदार

राष्ट्रहित का किया वरण था आज़ादी का प्रथम चरण था
राह चले तुम वहीं निरन्तर जहाँ आपदाएँ रही भयंकर
हर बाधा को हँसते पार किया त्याग अनवरत अपार किया
आज़ादी के संघर्षों के बने सिपहसालार

कालजयी व्यक्तिव तुम्हारा बारदोली के सरदार

आयी आज़ादी मगर दर्द था भारत बिखरा इधर उधर था
बीड़ा तुमने उठाया लिया सारा भारत मिला लिया था
जूनागढ़, निजाम ने तलवार विरोध की तानी थी
गाँधीवाद की छाया में पलते रौद्र रूप से अनजानी थी
दम्भी कॉप उठे भय से और किया एकीकरण स्वीकार

कालजयी व्यक्तिव तुम्हारा बारदोली के सरदार।

सबने तिरंगा थाम लिया था आपको नेता मान लिया था
पर आपके मन की अलग दिशा थी बात थी रखी राष्ट्रपिता की
पद का मोह ना कद की माया सर्वस्व देश पे लुटाया
जो भी आपने लिये फैसले सच था अंगीकार

कालजयी व्यक्तिव तुम्हारा बारदोली के सरदार

वो दिन भी ऐतिहासिक है जब तू काल से टकराया था
अन्तिम विदाई तुझको देने जन सैलाब उमड़ कर आया था
आम आदमी की जानिब तूने सोनापुर अपनाया था
सारा भारत रोया था सबसे शीश नवाया था
तुझे नमन है लौहपुरुष है कोटि-कोटि आभार

कालजयी व्यक्तिव तुम्हारा बारदोली के सरदार

@विक्रम प्रताप सिंह सचान सर्वधिकार सुरक्षित

अथ श्री सैफई कथा ....

अथ श्री सैफई कथा
आधुनिक कैकेयी कथा
रोते बिलखते प्रदेश की कथा,
ये कथा है,
एक परिवार की
परिजन जिसके बने स्वार्थी
ये कथा है लूट की मार की टकरार की
सारथी जिसके रहे
शिवापाल, रामगोपाल,अमर चाटुकार की
सत्य दिग्घोषित हुआ,
प्रजापति जी सार्थक सर्वदा
निरन्तर लुटी गोमती और नर्मदा
परिवार व्यूह में फॅसा प्रदेश
अब देखो हँसता सारा देश
समाजवाद का लगा पलीता
लो कटा उदघाट्न का फीता
अथ श्री सैफई कथा
आधुनिक कैकेयी कथा।








एक कुशल चालक की मानिन्द ......

ले दे के 18 साल का बालक 
३ सीटर टेम्पू का चालक 
पान बहार चबाता हुआ 
आवाज़ लगाता हुआ 
३ वाली में 7 सवारी बिठाता हुआ 
टेम्पू पर अपनी कुशलता दिखाता हुआ 

कमोवेश,
रामदेव के किसी योग की मुद्रा में 
सिकुड़ा हुआ, अकड़ा हुआ
कमाई के जाल में जकड़ा हुआ 
अपने पुष्ट उठाये 
अपने आयतन को मिनीमाइज करता हुआ  
एक और सावरी बैठाने के प्रयास में 
नज़रे इधर उधर फिराता हुआ 
गला फाड़कर चिल्लाता हुआ 

गिद्ध सी नज़रे सड़क पर जमाये 
टेम्पू आगे बढ़ता हुआ 
शॉर्टेस्ट पाथ अल्गोरिथम अपनाता हुआ 
हर समय एक और सवारी का स्कोप बनाता हुआ 
सारे सिस्टम को गलियाता हुआ 
आगे बढ़ा 
सड़क के नियमो और कानूनों पर चढ़ा 
रॉंग साइड में बचता बचाता हुआ 
गंतव्य की ओर 
एक कुशल चालक की मानिन्द ...... 

जिन्दगी किसी जद्दोजहद की तरह

जिन्दगी किसी जद्दोजहद की तरह
रूकती नही, चलती रहती है हवा की तरह।

टिमटिमाती सी रोशनी रही रातभर
कोई जलता रहा शमा की तरह

फिरता रहा वो रुसवाईयों की महफ़िल में
चाहते रही उसके लिये दवा की तरह

वो चाँदनी रात थी दीवाना कर गयी
किसी गुलबदन की अदा की तरह

हासिल क्या है जिन्दगी में हुज़ूर
रंग है कभी खुशियों कभी कजा की तरह