पाक के तोते होंगे फेल....

सतलुज, रावी, व्यास, चेनाब,झेलम, इंडस सभी नदियों का श्रोत भारत की सरजमी से है।....... ये वही बात हुयी कि जब सैंया भये कोतवाल तौ अब डर काहें का?

....... तो भैया छोड़ो रोना गाना, युद्ध- वुद्ध की बातें दिल्ली से बटोरों डेंगू और चिकनगुनिया का लार्वा और फैला देयो   बिलकुल रायता टाइप इन्ही नदियों की जलधार में,  देखो फिर कैसा हाहाकार मचता पाकिस्तानी मार्केट में सब  हुडुकचुल्लू टाइप मिसाइलों से फॉगिंग करते फिरेंगे। ईंट का जवाब पत्थर से देने वाली बात रह जायेगी। घुसपैठ का जवाब घुसपैठ से ...

पाक के तोते होंगे फेल
बनेगी नवाज की रेल
गंजी खोपड़ी में लगायेगा मच्छर उड़ाऊ तेल
जब मचाएगी चेनाब, राबी झेलम पेल 

फिर दिल्ली में औपचारिकता निभाई गयी।

तिरंगे में लिपटा हुआ
बहुत बहादुर दिखता हुआ 
रामलाल का बेटा
चिता पर लेटा 
देश के लिये कुर्बानी दी
राजकीय सम्मान के साथ सलामी ली

भावुक रामलाल बोला 
बेटा देश पे कुर्बान हुआ 
साधारण से महान हुआ 
अन्य परिजनों के आँसू  नहीं रुके 
बिना पिता, पति के हम कैसे जिये?

इन सब के बीच 
दिल्ली में हाई प्रोफाइल मीटिंग हुयी 
बिसलेरी की बोतलो से प्यास बुझाई गयी 
वातनुकूलित जगह पर 
चिन्ता जताई गयी 
निन्दा हुयी 
कड़ी कार्यवाही का विश्वास दिलाया गया 

कुछ दिन ही बीते है थे 
इस बारी श्यामलाल का बेटा 
तिरंगे में लिपटा हुआ 
बहुत बहादुर दिखता हुआ

 ...  प्रक्रिया दोहराई गयी 
बार बार सीमा से अर्थियाँ लायी गयी 
फिर दिल्ली में औपचारिकता निभाई गयी।






सौ तरह के जरूरत नहीं है, केवल डेंगू और चिकनगुनिया से काम हो लेगा....

आकाशवाणी में टीवी अक्सर एक गाना  सुनाई देता है" ........सौ तरह के रोज ले लूँ इश्क का मर्ज क्या ........"
अरे भैया कोई हो मार्केट में तो केवल दो मर्जो "डेंगू और चिकनगुनिया" की होम डिलीवरी कराओ भाई के घर होश फाख्ता हो जायेंगे..... यमराज के भैंसे नज़र आयेंगे!!!

@विक्रम

कट्टे की मानिन्द .....

व्हिसल ब्लोअर ने व्हिसल बजायी
भक्तों की भीड़ आयी
की बड़ी नुक्ताचीनी 
व्हिसल छीनी
पलटाई
कट्टे की मानिन्द
व्हिसल ब्लोअर के कान में लगायी
बजायी और जोर से बजायी
व्हिसल ब्लोअर भड़भड़ा गया
व्हिसल ब्लोअर लड़खड़ा गया
गच्चा खा गया
जमीन पर आ गया
अब हाथ जोड़े माफ़ी माँग रहा है
लोकतन्त्र का रक्षक भी जाग रहा है।
@विक्रम सर्वधिकार सुरक्षित

हमाम में सब नंगे कौन बताये.....

दफ्तर से आया
चाय पानी पिया
बेटी से हालचाल पूछे
स्कूल में होने वाले ढकोलसले
और बवाल पूछे
समाचार सुनने की गरज में टीवी चलायी
आवाज़ आयी

खबरों से पहले आप तक
पसन्दीदा चैनल आज तक
एंकर प्रकट हुये,
आज के मुख्य समाचार
कुछ इस प्रकार
चाचा भतीजे की ठनी
अमर सिंह पर तलवार तनी
फेसबुक से हुयी दोस्ती
प्यार में बदली पर महिला निकली दोगली
इमरान हाशमी नयी फिल्म में
कैटरीना को जबर्दस्त किस करेंगे,
सनी लियोने अहिल्या का किरदार निभाएंगी
माधुरी रुपहले पर्दे ओर फिर आयेगी
धक-धक टाइप कुछ गाँयेंगी

.... ब्रेक हुआ
रामदेव आये, अपने उत्पाद को राष्ट्रीयता से जोड़ा
पतंजलि मैगी बेची, फिर शहद थोड़ा
सब्र टूटा चैनल बदल डाला
NDTV आ रहा था
भाई समाचार में कार्टून दिखा रहा था
केजरी, मोदी, शाह बैक टू बैक
पुनः एंकर प्रकट हुये,
अभी आप सुन रहे थे मुख्य समाचार
अब जाने माने ज्योतिषी बतायेगे उपचार
एक एक कर कई सवाल आये
कई गृह धुरी से हटे, कई हटाये गये,
भविष्य वाले भगवान पटाये गये

एंकर फिर अवतरित हुये
रात 9 बजे देखिये सनसनी.....
अमेरिका में धँसी धरती
जिन्दा हुयी औरत मर चुकी

दिमाग शून्य होता उससे पहले
टीवी ऑफ किया हाथ में अखबार लिया
सम्पादकीय खोला पढ़ा
मन कुछ शांत हुआ
कादम्बिनी उठायी
मुख्य पृष्ठ पर लिखा था
पत्रकारिता मिशन का व्यवसाय
हमाम में सब नंगे है कौन बताये।

@विक्रम सर्वधिकार सुरक्षित

और हम मच्छर मार रहे थे,

श्रीहरिकोटा से मिसाइल पलायन कर रही थी,
बंगलौर कावेरी के पानी से जल रहा था,
महाराष्ट्र में मनसे थप्पड़ थेरेपी कर रहे थी,
व्हिस्लर ब्लोअर कपिल माफ़ी माँग रहा था,
और मच्छर मार रहे थे,
डेंगू और चिकनगुनिया से हार रहे थे।

आर्थिक विकास दिल्ली से होता हुआ
दिल्ली में ही सिमट रहा था
केजरी पंजाब और गोवा में भटक रहा था
शाहबुद्दीन जेल से सटक रहा था
और हम मच्छर मार रहे थे
डेंगू और चिकनगुनिया से हार रहे थे।

रेलवे टिकट के दाम बढ़ रहा था,
शेयर मार्केट लड़खड़ा रहा था,
CM चाचा पर डण्डे चला रहा था
CMO पूरी खबर झुठला रहा था
और हम मच्छर मार रहे थे
डेंगू और चिकनगुनिया से हार रहा था।
@विक्रम

सत्तासीन नेता जी.....

अद्वितीय भाषण शैली
नेता जी की रैली
रैली में आये
मंचासीन हुये
नज़रे तरेरी
इधर उधर फेरी
प्रदेश अध्यक्ष से बतियाये
भैया केवल 20 हज़ार जी भीड़ लाये?
माइक थामा
अभिवादन के साथ
1950 तक गये
वल्लभभाई को सराहे
गाँधी और नेहरू को गालियाये
1965 आये शास्त्री जी टकराये
प्रसंशा किये
इंदिरा को तानाशाह बताये
आपातकाल पर टूट पड़े
खोद डाली कांग्रेस की जड़े
हर पंचवर्षीय का हिसाब बताया
लूट का हिसाब किताब बताया
मण्डल और कमण्डल पर आये
हिलाएँ डुलायें, थोड़ा गंगागल फैलाएँ
पवित्र हुये,
20वी का लगभग सब बेकार
21वी शताब्दी से हुआ करार
कई वादे किये
सब कुछ सुधारने के इरादे किये
सत्तासीन हुये
गद्दी पर आसीन हुये
बाहर निकलना छोड़ दिया
हर वादा तोड़ दिया
अब 15 अगस्त को लाल किले से चिल्लाते है
कि हम सपने दिखाते है।
कि हम सपने दिखाते है।

आज हिन्दी दिवस है।

एक नवजात और उसकी माँ के बीच सम्वाद की कौन सी भाषा होती है? संकेतो की भाषा, भावों की भाषा, और आशायों की भाषा!!! भाषा जो परिभाषायों से परें है। किन्तु बेहद प्रभावी, बिलकुल साफ़ और सपाट। एक शान्त किन्तु बहती हुयी नदी की जलधार पत्थरों और चट्टानों के किस मधुर भाषा में बात करती है। दूर क्षितिज में उड़ते पक्षियों का कलरव जिस तरीके से प्रकृति से बात करता है। रिमझिम बारिश की बूँदे जिस सुगमता के साथ हवायों में समाहित हो धरती की ओर हवायों से बात करती चली आती है। दूर पहाड़ो के पीछे से आती भोर  पहली किरण जिस हर्ष और उल्लाष से एक जीव से बात करती। उसी सुगमता, सरलता, मधुरता और तरलता से हिन्दी हमसे बात करती है। हम हिन्दी से बात करते है। 

हिन्दी ह्रदय की भाषा है। हिन्दी हमारी संस्कृति की भाषा है। हिन्दी हमारे सँस्कार की भाषा है। हिन्दी का उत्थान सम्पूर्ण विश्व में हमारे प्रचार की भाषा है।  हिन्दी हमारे अन्दर के शिल्पकार की भाषा है। हिन्दी हक़ से पढ़ें और पढ़ायें बोले और अपनायें। 

कि अब कविता नहीं कुछ और लिखूँगा

मन में इरादा है,
अपने आप से भी वादा है
कि अब कविता नहीं कुछ और लिखूँगा
मजदूर की हथेलियों की रेखाएँ लिखूँगा
अँगुलियों का एक- एक पोर लिखूँगा
कविता नहीं कुछ और लिखूँगा।

हर शहर हर कस्बे में रोज
सुबह-सुबह लगने वाली
दिहाड़ी मजदूरों की मण्डियों में
सर छुपाने तक के लिये
नहीं है कोई ठाँव और ठौर लिखूँगा।
कविता नहीं कुछ और लिखूँगा।

विकास की खोखली बात के बीच
रोजगार के काले प्रकाश के बीच
रोज सँवर कर निकलती महँगाई के बीच
गरीब के निवाले और कौर लिखूँगा
कि अब कविता नहीं कुछ और लिखूँगा


जिसको जिन्दगी खुद जीती है
व्यवस्था जिसका लहू हर शह पीती है
सड़क किनारे बने आशियानों का
गिरता हुआ हर छोर लिखूँगा
मानवता के परभावो का दौर लिखूँगा।
कि अब कविता नहीं कुछ लिखूँगा।

सच को हजम करने की कयावद
झूठ के अनवरत होने की रवायत
सरकार के मन का चोर लिखूँगा
कमजोरो पर ही चलता उसका जोर लिखूँगा।
कि अब कविता नहीं कुछ और लिखूँगा।।

@विक्रम सर्वाधिकार सुरक्षित



नोयडा की हवाई इन्सानी बस्तियाँ

नोयडा की हवाई इन्सानी बस्तियाँ
घर मानो हवा में तैरती कश्तियाँ
आस-पास कंक्रीट का जंगल
बची खुची जमीन पर गाड़ियों का दंगल
बाकी सब कुशल मंगल

सीमेंट की बीमों पर पक्षियों के घौसले
हवा में तड़पते तन्हा बच्चो के हौसले
हवा में फिजा में चहूँ ओर चोंचले
ऊँचाईयो का दस्तूर,फिजूल के फितूर
कायम है दिखावे का शगल

बाकि सब कुशल मंगल

हवाएँ रस्ता खोज नहीं पाती
दीवारों से अनवरत सर टकराती
रिश्ते नाते और सामाजिकता
दूर का होता है इनसे नाता
पता नहीं हित रहता है कौन अगल-बगल
बाकि सब कुशल मंगल