जिन्दगी किसी बुरी आदत सी हो चली है ........

मान लीजिये की ग्रामीण परिवेश में रहने वाले "बुधिया" के बेटे ने मुहब्बत कर ली, अन्तरजातीय मुहब्बत!!! अब पंचायतें बैठेगी, बुधिया की शामत आयेगी और कानून हताश और निराश खुद अपना अस्तित्व बचाने के लिये तरसता होगा ऐसे में गौर फरमाये .........

अख़बारों में छप चले, इन्सानियत के कारनामें
देखिये अब मुहब्बत भी, शहादत सी हो चली है। 

कानून के दाँव पेचों ने हलकान कर दिया है 
उलझनों का कहानी, क़यामत सी हो चली है 

दिन रात है लगाये, अदालतों के चक्कर
खुद से भी बड़ी, शिकायत सी हो चली है।

बोझिल सी शाम है अब, डरावनी सी रातें
जिन्दगी किसी बुरी आदत सी हो चली है।

व्यवस्था के जाल में वो उलझ चुका है पूरा 
बुधिया घर में खुशियाँ शामत सी हो चली है।

@Vikram

नोट: सर्वाधिकार सुरक्षित

हसरतें जब पाली नहीं तो अब जवानी क्या करे

उलझनों में फँस गयी है जिन्दगानी क्या करे
शर्म तो मर चुकी है आँख का पानी क्या करे

हसरतें जब पाली नहीं तो अब जवानी क्या करे
प्रेमिका तो छिन गयी, खाली निशानी क्या करे

जुल्मो सितम के दौर में एक मेहरबानी क्या करे
तहजीब का निकला जनाजा बस मेजबानी क्या करें

रोशनी सूरज की भारी, हवा और पानी क्या करे
रात गर्म चादर में लिपटी,नानी की कहानी क्या करे।

ताल तलैया सूखे पड़े सब, अब खेती किसानी क्या करे
हरियाली की हत्या हो गयी, अब रातरानी क्या करे?

भ्रूण में मरती है बेटी, अब जनानी क्या करें
कुलदीपक की आश में, लोग खानदानी क्या करें?

आस्थाओं के जंगल में, लोग विज्ञानी क्या करें
जब पत्थरों में देवता है,जनता अज्ञानी क्या करें?

साजिशों में फँस गयी, बेचारी नादानी क्या करें
कश्तियाँ कुछ डूबी तो है, मौजो की रवानी क्या करें?

-विक्रम

-@Vikram सर्वाधिकार सुरक्षित
नोट : ये रचना डॉ कुँवर बेचैन जी की रचना से हलकी सी प्रभावित है। 

क्यूँ हुयी Intel में जॉब कटौती?

हाल फिलहाल दुनिया की सबसे बड़ी semiconductor निर्माता Intel Corporation ने लगभग 12000 लोगों को नौकरी से विदा करने की घोषणा की है। ये सँख्या कुल कर्मचारियों की सँख्या की 11 प्रतिशत है। Intel यदि १२००० लोगो को नौकरी से विदा करती है तो वास्तविकता में अप्रत्य्क्ष रूप में इससे कहीं ज्यादा नौकरी जायेगी। Intel के काम का एक हिस्सा सर्विस बेस्ड कम्पनी जैसे Infosys, TCS, IBM द्वारा भी किया जाता है। जाहिर है कुछ लोगों यहाँ भी प्रभावित होगे। Intel विश्व में कम्प्यूटर और नोटबुक के मार्केट में लगभग 80 फ़ीसदी की भागीदारी लम्बे समय से रखता आया है। 1968 में स्थापित Intel ने 80,90 के दशक में x86 प्रोसेसर के साथ तत्पश्चात SRAM,DRAM, नेटवर्क कार्ड्स, मदरबोर्ड के साथ दशकों तक एक छत्र छाया रहा है। ये सोचना भी लाजिमी हो चला है की आखिर क्या मुख्य करक रहे होगे जिसके चलते विश्वसनीयता के लिये जानी जाने वाली कम्पनी Intel ने ये कदम उठाया।

कम्प्यूटर और नोटबुक के मार्केट का उतार का दौर: 
२१ शताब्दी का दूसरा दशक मोबाइल कंप्यूटिंग डिवाइस के नाम रहा। मोबाइल की बढ़ती कम्प्यूटेशन क्षमता और हमेशा पास रख पाने की कसहजता ने मोबाइल की लोकप्रियता को जन-जन तक पहुँचा दिया। उसी के चलते कम्प्यूटर, नोटबुक, और कैमरा इत्यादि का मार्केट संतृप्त सा हो गया। 

जहाँ एक ओर Intel का कम्प्यूटर और नोटबुक के क्षेत्र में एकाधिकार रहा वहीं दूसरी ओर मोबाइल डिवाइस में Intel की प्रतियोगी ARM के बजीमारी ARM के कोर का इस्तेमाल कर चिप बनाने वाली कम्पनी Qualcom, NXP व अन्य ने मोबाइल का बड़ा बाजार हथिया लिया। कम्प्यूटर से मोबाइल के इस सफर में Intel पीछे रह गया। या यूँ कहना बेहतर होगा की Intel का मुनाफा उस दर से नहीं बढ़ सका जिसकी की उम्मीद थी। आज के दौर दुनिया के 82 फ़ीसदी फ़ोन एंड्रॉयड पर आते है और उनमे ARM SOC का इस्तेमाल होता। कम पावर में अधिक कम्प्यूटिंग, कम हार्डवेयर की जरूरत ARM के आगे ले गया। 

कम पावर में ज्यादा कम्प्यूटिंग और IOT का चलन :
मोबाइल, फिटनेस डिवाइस,टेलीमैटिक्स के क्षेत्र में कम ऊर्जा के इस्तेमाल से ज्यादा इनफार्मेशन हासिल करने दौर है। डिवाइस का फॉर्म फैक्टर कम होना एक जरूरत है ताकि उसे आसानी से कैरी किया जा सके। या पर ARM आधारित डिवाइस ज्यादा उपयुक्त है। IOT ( इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स ) मूलतया ARM पर ही आधारित है। कुल मिलाकर। इन्टेल एक एक बड़े और उभरते मार्केट से प्रतक्ष्य रूप से दूर रहा।  इस क्षेत्र में की हिस्सेदारी लगभग ४ प्रतिशत ही रह गयी। इसी का खामियाजा किम विकास दर भुगतना पड़ा। 

Cloud कम्प्यूटिंग का मार्केट अभी भी Intel की ताकत:
हालाँकि कम्प्यूटर और नोटबुक का मार्केट घटा है किन्तु क्लाउड कंप्यूटिंग में उदभव के बाद अधिक प्रोसेसिंग क्षमता वाली डिवाइस का ज्यादा उपयोग शुरू हुआ। यहाँ Intel ने बढ़त हासिल की। इस क्षेत्र में लगभग 80 फ़ीसदी की भागीदारी अभी भी है। लेकिन समय के साथ NVIDIA, Qualcom वा अन्य भी इस क्षेत्र में चुनौती देने के लिये तैयार है। जाहिर है खर्चे कम और एक दिशा में ऊर्जा लगाने का प्रयास ही है ये 12000 नौकरियों की कटौती।

साभार :http://www.tomshardware.com/reviews/intel-cpu-history,1986-13.html

कुल मिलाकर तेजी से बदलती तकनीकि के दौर में कोई व्यवसाय सुरक्षित नहीं है, सृजन और विजन दोनों जरूरी है। Nokia इसका सबसे मजबूत उदहारण है। हालाँकि Intel अभी भी एक बेहतर कम्पनी है। बस एक बिरे दौर से गुजर रही है। जहाँ धीरे धीरे विकास दर काम हो रही है। किन्तु बदलाव कई बार सुखद अनुभव लेकर आता है।

मेरा वजूद तब मुकम्मल नहीं होता

मेरा वजूद तब मुकम्मल नहीं होता
जब तेरा ख्याल जहन में नहीं होता।

भटकते फिरते मन्दिरो मस्जिद में
जो मेरा खुदा मेरे घर पर नहीं होता।

ये बरसात धूप हवायें सब हवा है
जब तलक तू मेरे शहर में नहीं होता।

शाम रोशन कभी हो नहीं पाती
जो तू चरागों विस्मिल नहीं होता।

मैं पतंगा हूँ, तेरे होने से मै हूँ हमेशा
जो तू नहीं होता तो मैं नहीं होता।

@विक्रम सर्वाधिकार सुरक्षित

दर्द था कुछ जमा हुआ पिघल आया है।

भूकम्प के कम्पन दिल तक पहुँचे हो तो या फिर जल्द से जल्द घर से बाहर निकल सुरक्षित जगह जाने की व्याकुलता महसूस हुयी तो समझने की कोशिश कीजियेगा।

धरती की पेशानियों पे बल आया है
आदमी घर से बाहर निकल आया है।

एक अरसे  से परेशान है कुदरत यहाँ
दर्द था कुछ जमा हुआ पिघल आया है।

ये हवा, पानी ,फिजाये सब दोजखनशीं है
जब से आदमी में विलासिता का शगल आया हैं।

बस अपना घर बचाने की जद्दोजहद है
कि मौसम रोता हुआ मेरे घर आया है।



मातम है , सियासत का असर लगता है।

कश्मीर जल रहा है, धर्म की आग में सियासत की आँच में  बस उसी पर चन्द  शेर  ........ 
अब ये शहर , फसादों का शहर लगता है 
मातम है , सियासत का असर लगता है। 

फ़ना हो जाने को तैयार है दीवाने कितने  
यही धर्म है? की मानो जहर लगता है। 

एक मुद्दत में जिन्दगी जवान हो पाती है 
उजड़ने में बस एक पहर लगता है। 

हिल गयी है, मजबूत नींव भी कई घरों की  
ये  नयी इन्सानियत का कहर लगता है 

कल फिर सूरज उगेगा और चाँद भी
पर आज बड़ा तन्हा  ये सफर लगता है  

-विक्रम 



What is "Adhaar Bill"? and why there is debate on passage of that?

What is "Adhaar Bill"
"Adhaar Bill" enables "Adhaar Card" as a legal tool to get various ongoing government benefits and it will be mandatory in nature. That simply means Personal Information of resident is going to go in digital form in some server. using which a person can be Identified.  

In gone session of parliament, "Adhaar bill" has been introduced as "Money bill". Though, it does not fall in-line with the definition of "Money bill" and therefore it attracted lot traction from critics. As last year supreme court also raised it eyebrows citing breach of "Personal Information Security rights". That gave lot of energy to critics.

Why "Adhaar Bill" Is raised as Money Bill?
It is well known that Modi's government do not have majority in Upper house,  As "Money Bill" do not require approval from upper house that is the catalytics factor that "Adhaar Bill" has been introduced as money bill. Upper house can only suggest changes and it's upto lower house to accept or reject them. And if upper house do not respond in 14 days time-line the bill is deemed to be passed.

Why "Adhaar Bill" attracting lot of debate?
Adhaar project, started with the motive to captures biometric information of  Indian residents. To uniquely identify them at any point of time. This idea was drwan from various other developed countries, though they executes this in bit different fashion. In process to capture biometric information there is lot of technology involved, but that is not proven in ground. Technology drives to store biometric information, But question is how mature the technology is????

Critics point of view:
Questions which critics are raising about maturity of technology are catalyzed from fact that when Apple Inc, a mobile giant when launched fingerprint sensor very first time, hacker where able to break the security with-in 24 hours from launch. And couple of year later Apple Inc. again came back with improved version of finger print sensor and this also hackers breached security almost in no time.

This raises threat of  theft of biometric information. Which poses threat of new type of crime which can be cyber crime, can be Physical crime with use of biometrics Info. As India we are not mature enough to tackle that kind of crime in near future.

Technology is advancing in every field, Likewise a high resolution camera can enable as person to copy finger prints and eye Cornea Info. German Chancellor, Angela Markels, identity was theft last year. That Initiated as new debate, When biometric info of such a powerful politician is not safe the then how come a common man will survive???

Proponents Points of view:
Supporters of  "Ahdaar Bill"  pitchs-in with factual information, the revolution which Unique Identity can drive, in regard Public distribution system(PDS), Identifying unprivileged, Routing benefits to directly to them. Government of India Came-up with some factual data. Though that was questioned by some Institutions.

My point of view:
There is no doubt that biometric information of individual can be theft and misused, but with the time we will also evolve to handle such criminal cases as well. How we soon we can do it that is going to matter. We can not keep ourselves restricted in taking technological advance steps due to some threat.

I can counter critics point of view by borrowing data from history. With the revolution in Telecom-sector  each and every subscriber was identified by Unique identity!!! Though, there was not biometric information involved but Information of person Identity proof, Address, Pics, Body-mark for identification where involved. On top of everything there was personal communication was involved. Telecoms service provider can record that If police instructs them. But that never triggered big crime. Rather it has helped police to crack criminal cases as mobile enables service provider to capture location.

Other benefits which can be drived out of Adhaar:
- By linking Driving licenses, driving pattern of driver via number of "Chalaans" can be identified to restrict traffic violation.
- By Linking PAN card, bank account, id proof transaction of can be tracked.
- Especially, In India there "Khoya Paya" and unclaimed dead bodies which can be identified easily.

In total "Adhaar Bill" is good to have, government should note point of critics and should think-off how to address them going ahead.

Note:  Some of the data point is drived from "Frontline" April edition.