KDA - Kanpur Developement Authority - RTI 3806 -Dupsachiv -413-14 answers

Filing RTI for getting your work done or getting your queries answered goes hard sometime. Recently, I filed RTI to get some information on function of KDA - Kanpur Development Authority and it has taken 90 days to get the answer. Though detailed answers were provide at the end. But it has taken effort to file RTI and then appeal as well. This case can be applicable to RTI cases of all development authorities located across country. Steps to get information below
1. File application for process to file click here. Application for RTI with  KDA is Use the same address for first appeal ( address to appellate authority this time.)
"Kanpur Development Authority
  Moti Jheel Campus Kanpur (UP)"

2. Wait for 35 days( consider 5 days as potal delay) at max, if filed to CPIO and filing first appeal to avoid delay.

3. If first appeal not replied on time one can file appeal to CIC of particular state. In Uttar Pradesh address CIC appeal address are below:

कार्यलय का पता :         राज्‍य सूचना आयोग
         615ए इन्दिरा भवन
         अशोक मार्ग
         लखनऊ उत्‍तर प्रदेश
         दूरभाष (0522) 2288949
         फैक्‍स  (0522) 2288600
         ई-मेल sec.sic@up.nic.in , scic.up@up.nic.in

ज.सू.आ. :        मा0 माता प्रसाद
         615ए इन्दिरा भवन
         अशोक मार्ग
         लखनऊ उत्‍तर प्रदेश
         दूरभाष (0522) 2288749

प्रथम अपीलीय प्राधिकारी :      
         मा. सचिव
         615ए इन्दिरा भवन
         अशोक मार्ग
         लखनऊ उत्‍तर प्रदेश
         दूरभाष (0522) 2288627

Original application for these RTI answers can be tracked here
RTI 3806 -Dupsachiv -413-14

Note: Do not expect replies of e-mails. As e-mail are hardly replied by Government offices. Consider Registered/speed post best way to communicate with government.

जाति और धर्म की आग में सुलगता रहा और पिछड़ता रहा उत्तर प्रदेश।

उत्तर प्रदेश, उत्तम प्रदेश कब बनेगा ये प्रश्न दशकों से अनुउत्तरित है।  विकास, आर्थिक आधार, और सामाजिक समनाता के मोर्चे पर लगातार गिरावट देखी गयी है। पूरी सम्भावना है की भविष्य में भी सुधार नहीं होगा।  90 के दशक में उत्तर प्रदेश ने कांग्रेस से तो निजात पा ली पर छद्म समाजवाद की आग में ऐसा जला, कि आजतक  सुलग रहा है। जाति और धर्म के आधार पर प्रदेश कई हिस्सों में विभाजित होता रहा और लखनऊ हँसता रहा । सियासत होती रही रियाया रोती रही ।  कभी मंडल के कमंडल ने तो कभी सियासी रथों ने प्रदेश में जाति और धर्म की दीवार खीची। समाजवाद की सियासत हुई, बहुजन समाज की सियासत हुई और इन सब में हारा उत्तर-प्रदेश और उत्तर-प्रदेश के वासी।

राजनीति चिंताजनक स्तर तक गिर गयी। 
राजनेतायों ने अपने स्वार्थ साधे और साझा सरकारें बनी। कभी तुम कभी हम का सूत्र इस्तेमाल हुआ।  प्रदेश बदहाल हुआ। विकास की बात पिछले २ दशकों में शायद ही किसी ने की। पतित होते नैतिक मूल्यों ने इन्सान को इन्सान से लड़ाया और देश की मुख्य धारा से प्रदेश को इस हद तक काट दिया की वर्तमान भी रक्त-रंजित है। लोग आज भी मर रहे है खून अब भी बहा रहा है। मालूम होता है की देश को कई प्रधानमंत्री देने वाला प्रदेश उच्चकोटि के नेता पैदा करने में असमर्थ सा हो गया है।  प्रदेश स्तर के दलों के जन्म ने इस समस्या को और बढ़ाया। यकीन नहीं होता की कृष्ण-कन्हैया और मर्यादा पुरुषोत्तम की जन्म और कर्म भूमि बन्जर हो गयी है . यकीन नहीं आता की १८५७ की क्रांति यही से शुरू हुई थी।  रामप्रसाद विस्मिल, चंद्रशेखर आज़ाद, गणेश शंकर विधार्थी इसी जमीन पर पैदा हुये। 

 साभार www.cultureholidays.com 

आर्थिक विषमता एक हद तक बढ़ गयी और साथ ही अपराध भी।
लगातार बढती सामजिक विषमता से अपराध का ग्राफ तेजी से चढ़ा है।  सरकारे आयी और गयी किन्तु इस पहलू पर विचार करना तो दूर इसके मूलभूत कारणों की पहचान करने की जगह इस प्रवृति को बढ़ावा दिया गया।  एक हद तक इसके लिए लोगो के नैतिक स्तर का अवमूल्यन, रानजीति का गिरता स्तर जिम्मेदार कहा जा सकता है।  क्यों कि जाति और धर्म के आधार पर की गयी राजनीति से किसी भी समाज का भला न हुआ है न होगा। प्रदेश में व्याप्त भ्रस्टाचार ने, नौकरशाही के कानून से भी लम्बे हाथों ने आवाम के अधिकारों में बट्टेमारी की। जनता की आवाज़ किसी को सुनायी नहीं दी। मूलभूत अधिकारों के लिए भी लड़ाई लड़नी पड़ी।

उधोग-धंधों के विकास में भारी गिरावट आयी लोगो का पलायन बढ़ा। 
बीते दशकों में प्रदेश सरकार कि ढीली आर्थिक नीतियों के चलते उधोग-धंधे कम हुए और साथ ही कम हुई रोजगार कि सम्भावनाये भी। परिणामस्वरुप प्रदेश के लोगो को रोजगार कि तलाश में पलायन करना पड़ा। चिंता का विषय ये है के पलायन मुख्यता उन लोगो ने किया जो रोजगार के लिए किसी विशेष क्षेत्र में प्रवीणता नहीं रखते। कारण स्पष्ट है कि सरकार ने कोई ऐसी नीति नहीं निर्धारिक कर पाई जो लोगो को रोजगार पाने कि दिशा में कुशलता दे। बात यही खत्म नहीं होती केवल कृषि को बढावा देने मात्र से ही प्रदेश कि बहुतायत समस्याओं का निदान हो सकता था। किन्तु कृषि प्रधान प्रदेश में कृषि को नयी तकनीकी देने के लिए ठोस कदम शायद ही उठाये गए। और जो उठाये गए वह महज औपचारिकता बन कर रहे गए। यदि समय रहते कदम उठाये गए होते तो नि:सन्देह रोजगार कि तलाश में होने वाला पलायन रुक सकता था। और साथ ही प्रदेश कि आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ सकती थी। दूसरा पहलू जिसे नज़रन्दाज़ किया गया वो शहरी क्षेत्रों में उधोग को बढ़ावा देने का। अनियोजित शहरी कारण बढ़ा पर रोजगार के अवसरों में कोई वृद्धि नहीं हुई। कारण जाहिर है, प्रदेश सरकार कि ढुलमुल नीतियों के कारण देश के बड़े औधोगिक घरानों ने प्रदेश से दूरी बनाये रखी और प्रदेश बद से बदहाल होता रहा है। तंगहाल मूलभूत सुविधायों के कारण पहले से स्थापित उधोग भी पलायन करने को मजबूर हुए। देश बढ़ा और उत्तर प्रदेश घटा। सूचना तकनीति के उधोग तेजी से उभरे पर प्रदेश सरकार इस उधोग से भी कदम मिला कर चलने में चार कदम पीछे ही रही।

Update on RTI to PMO on Neta Ji "Subash Chandra Bose" Bharat Ratn Award


"RTI 43020 /01 /2013" सूचना का नवीनीकरण:
प्रधानमंत्री कार्यालय(पीएमओ) को "सूचना अधिकार अधिनियम-2005" के तहत भेजा गया पत्र  प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा गृहमंत्रालय को अंतरित किया गया था। तत्पश्चात गृहमंत्रालय ने सूचना देने का निर्देश देते हुए अपने विधि विभाग को ये पत्र अंतरित किया है। कारण स्पष्ट है की जिस सूचना के लिए आवेदन किया गया था शायद ये विधि विभाग से ही दिया सकता है। 

निष्कर्ष: 
यदि आवेदनकर्ता सूचना हेतु अप्रत्यक्ष रूप से सम्बंधित विभाग से सूचना के लिए आवेदन कर देता है तो ऐसे मामले में उक्त विभाग द्वारा सम्बंधित विभाग को  ये पत्र प्राप्ति के 5 दिन के अन्दर प्रेषित करना होता है।   जैसा की "RTI 43020 /01 /2013" में हुआ।  सूचना प्रधान मंत्री कार्यालय से मांगी गयी थी।  इस आधार पर की भारत रत्न की संस्तुति राष्ट्रपति को प्रधान मंत्री द्वारा की जाती है, पर शायद प्रधान मंत्री इस मामले में गृहमंत्रालय की सिफारिशें स्वीकार कर के आगे की कार्यवाही  करता है। इसी कारण सूचना के लिए पत्र पहले  गृहमंत्रालय  तत्पश्चात गृहमंत्रालय के विधि विभाग को अंतरित किया गया है।  जवाब ३० दिन के अन्दर प्राप्त होने की आशा है।  तत्पश्चात ब्लॉग में सूचना प्रेषित की जाएगी। 

RTI 43020 /01 /2013 गृहमंत्रालय के सूचना अधिकार विभाग से प्राप्त पत्र 
RTI 43020 /01 /2013 गृहमंत्रालय के विधि विभाग के सूचनार्थ अंतरित सूचना अधिकार का पत्र



साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल, रघुपति राघव राजा राम



दे दी हमें आज़ादी बिना खड्‌ग बिना ढाल
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल

आंधी में भी जलती रही गांधी तेरी मशाल
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल

धरती पे लड़ी तूने अजब ढब की लड़ाई
दागी न कहीं तोप न बंदूक चलाई
दुश्मन के किले पर भी न की तूने चढ़ाई
वाह रे फकीर खूब करामात दिखाई

चुटकी में दुश्मनों को दिया देश से निकाल
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल

शतरंज बिछा कर यहां बैठा था ज़माना
लगता था कि मुश्किल है फिरंगी को हराना
टक्कर थी बड़े ज़ोर की दुश्मन भी था दाना
पर तू भी था बापू बड़ा उस्ताद पुराना

मारा वो कस के दांव कि उल्टी सभी की चाल
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल

जब जब तेरा बिगुल बजा जवान चल पड़े
मजदूर चल पड़े थे और किसान चल पड़े
हिन्दू व मुसलमान सिख पठान चल पड़े
कदमों पे तेरे कोटि कोटि प्राण चल पड़े

फूलों की सेज छोड़ के दौड़े जवाहरलाल
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल

मन में थी अहिंसा की लगन तन पे लंगोटी
लाखों में घूमता था लिये सत्य की सोंटी
वैसे तो देखने में थी हस्ती तेरी छोटी
लेकिन तुझे झुकती थी हिमालय की भी चोटी

दुनियां में तू बेजोड़ था इंसान बेमिसाल
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल

जग में कोई जिया है तो बापू तू ही जिया
तूने वतन की राह में सबकुछ लुटा दिया
मांगा न कोई तख्त न तो ताज ही लिया
अमृत दिया सभी को मगर खुद ज़हर पिया

जिस दिन तेरी चिता जली रोया था महाकाल
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल


De di hamein aazaadi bina khadag bina dhaal
Saabaramati ke sant toone kar diya kamaal

Aandhi mein bhi jalati rahi gaandhi teri mashaal
Saabaramati ke sant tuune kar diya kamaal

Dharati pe ladi toone, ajab dhang ki ladaai
Daagi na kaheen top, na bandook chalaai
Dushman ke kile par bhi, na ki tuune chadhaai
Vaah re fakeer khoob karaamaat dikhaai
Chutaki mein dushmanon ko diya desh se nikaal
Saabaramati ke sant tuune kar diya kamaal

Shataranj bichha kar yahaan, baitha tha zamaana
Lagata tha mushkil hai, firangi ko haraana
Takkar thi bade zor ki, dushman bhi tha taana
Par tu bhi tha baapu, bada ustaad puraana
Maara vo kas ke daav, ke ulati sabhi ki chaal
Saabaramati ke sant tuune kar diya kamaal

Jab jab tera bigul baja, javaan chal pade
Mazadoor chal pade the, aur kisaan chal pade
Hindu aur musalamaan, sikh pathaan chal pade
Kadamon mein teri, koti koti praan chal pade
Phoolon ki sej chhod ke, daude jawahar laal
Saabaramati ke sant tuune kar diya kamaal

Mann mein thi ahinsa ki, lagan tan pe langoti
Laakhon mein ghoomata tha, liye satya ki sonti
Waise to dekhane mein thi, hasti teri chhoti
Lekin tujhe zhukti thi, himaalay ki bhi choti
Duniya mein bhi baapu tu, tha insaan bemisaal
Saabaramati ke sant tuune kar diya kamaal

Jag mein jiya hai koi, to baapu tu hi jiya
Tuune vatan ki raah mein sab kuch luta diya
Maanga na koi takht na koi taaj bhi liya
Amrit diya sabhi ko, magar khud zahar piya
Jis din teri chita jali, roya tha mahaakaal
Saabaramati ke sant tuune kar diya kamaal

De di hamein aazaadi bina khadg bina dhaal
Saabaramati ke sant tuune kar diya kamaal