राष्ट्र-कवि "मैथिली शरण गुप्त" की अमर रचना: नर हो न निराश करो मन को


Nar Ho na Niraash karo man ko
नर हो न निराश करो मन को

नर हो न निराश करो मन को
कुछ काम करो कुछ काम करो
जग में रह के निज नाम करो।

यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो!
समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो।
कुछ तो उपयुक्त करो तन को
नर हो न निराश करो मन को।

सँभलो कि सुयोग न जाए चला
कब व्यर्थ हुआ सदुपाय भला!
समझो जग को न निरा सपना

पथ आप प्रशस्त करो अपना।
अखिलेश्वर है अवलम्बन को
नर हो न निराश करो मन को।।



जब प्राप्त तुम्हें सब तत्त्व यहाँ
फिर जा सकता वह सत्त्व कहाँ!
तुम स्वत्त्व सुधा रस पान करो
उठ के अमरत्व विधान करो।
दवरूप रहो भव कानन को

नर हो न निराश करो मन को।।



निज गौरव का नित ज्ञान रहे
हम भी कुछ हैं यह ध्यान रहे।
सब जाय अभी पर मान रहे
मरणोत्तर गुंजित गान रहे।
कुछ हो न तजो निज साधन को
नर हो न निराश करो मन को।।


 

RTI goes online: For specific departments of central government based at Delhi

Who Initiated RTI online:
An Initiative of Department of Personnel & Training, Government of India.
Link to RTI online web portal : Click Here

How Online RTI works, process of routing RTI application?
There is appointed nodal RTI officer for every ministry/department of central government based at Delhi. Nodal officer once receive RTI application in electronic form( Filed by applicant) he forwards it to concerned department CPIO. Forwarding to CPIO means that applicant's RTI application reached to intended authority. If respective department follow RTI rules the applicant is ensured to receive requested information with time limit of 30( prescribed in RTI act 2005 when application filed to CPIO)
Flow Diagram to file application and get information -
RTI Application Online ( Electronic Format)  ------------>>> Web Portal ------------>>> Nodal officer of respective department/ministry ------------>>> CPIO of the Sub ministry/department  ------------>>> Information in 30 days to applicant
If answer not received -
If answer not received in 30 days time frame  ------------>>> file first appeal using same portal( no fee required for first appeal) ------------>>>If still did not get answer/satisfactory answer ------------>>> File appeal with CIC- chief information commissioner though portal cicindia 
 
What is Benefit of RTI online:
- Filing RTI application goes cheap here as applicant has to spent only INR 10. 
- Filing RTI by post cost at least INR 50 and on top of that getting postal order of INR 10 is very difficult in local post office. Applicant end up by visiting head post office of city most of the time. Applicant get benefit of time as no visit to post office is required at all. 
- Applicant will get answer via e-mail.Status tracking of RTI is visible and one can expect RTI reply with-in 30 day from filing as there are no postal delay involved.
- RTI account tracking as simple as mailbox management.
- The most important point is that you will get RTI unique number on the spot. On other in filing of postal RTI , if department does not reply there is no RTI number with you, applicant need to keep all docs photocopy as proof all the time.
- Location is not a constraint in this case one can file RTI application while sitting any part of Globe.

To whom RTI can be filed:
1. Cabinet Secretariat
2. Central Board of direct taxes
3. Central Board of excise and custom- Central Excise, Customs
4. Department of administrative Reform and PG
5. Department of Agriculture Research  and Education
6. Department of Agriculture and cooperation
7. Department of AIDS Control
8. Department of Animal Husbandry, dairying  and fisheries
9. Department of Atomic Energy
10. Department of AYUSH
11. Department of Defence
12. Department of Bio-technology
13. Department of Chemicals and Petrochemicals
14. Department of Commerce
15. Department of Consumer Affairs
16. Department of Defence
17. Department of Defence Production
18. Department of Disinvestment
19. Department of Economic Affairs
20. Department of Expenditure
21. Department of Ex-Serviceman welfare
22. Department of Fertilizers
23. Department of Financial services
24. Department of and public distribution
25. Department of Health and family welfare
26. Department of Health Research
27. Department of Heavy Industry
28. Department of Higher Education
29. Department of Industrial policy and Promotion
30. Department of Information technology
31. Department of justice
32. Department of Legal affairs
33. Department of pension and pensioners welfare
34. Department of personnel and training
35. Department of pharmaceuticals
36. Department of Posts
37. Department of public enterprises
38. Department of revenue
39. Department of school education Literacy
40. Department of Science and technology
41. Department of Scientific and industrial research
   etc ......

For any help or queries one can approach.
Help Desk : For any query or feedback related to this portal, Please contact at 011-24622461, during normal office hours(9:00 AM to 5:30 PM, Monday to Friday except Public Holidays) or send an email to helprtionlinedopt@nic.in
PS: As per my personal experience helpline service is good as of they pick your call and they answer your queries patiently.

Home page of RTI online user looks like:
Home page of RTI online for registered user.
 Status tracking of your RTI application looks like:
RTI online Status tracking with Unique RTI file number
Note that after filing RTI application online applicant will be provided the e-mail id of concerned CPIO.Using this facility, I have filed one RTI and yet to get response as on 24/08/2013. Sole intent to Publishing this article is to make probable RTI applicant aware of the fact that RTI is available online. 

RTI to PMO on Neta Ji "Subash Chandra Bose" Constitutional Status and Bharat Ratn Award

RTI application to PMO CPIO -
Subject : Why "Bharat Ratn" had been taken away from Neta Ji "Subash Chnadra Bose" ji once it was awarded to him on 1992, What is constitutional status awarded to Neta ji for his service to nation in freedom fight? 
Queries Send to RTI officer PMO on "Neta Ji's" Bharat Ratn issue of 1992  


Fees Paid to Section RTI officer PMO Via Postal Order



RTI Reply front looks like this: PMO CPIO via resgistered post

This is Partial reply from PMO RTI officer directing internal department for further action.

14 सितम्बर: हिन्दी दिवस - अपनी सभ्यता को बचाने के लिए हिन्दी को अपनाना होगा !!

निज भाषा उन्नति अहे, सब उन्नति को मूल।
बिन निज भाषा ज्ञान के मिटे न हिय को शूल।।
                                                                - भारतेंदु हरिश्चंद

विगत कई दशकों से हिंदी उपेक्षित है। हालांकि नैतिक आधार पर ये गलत है। किन्तु कमोवेश देश का हर नागरिक या तो अंग्रेजी का ज्ञान पाने की चाहत रखता है।  या तो ये ज्ञान कम से कम अपनी आने वाली पीडियों को दे कर जाना चाहता है। कारण जाहिर समाज में रोजगार को मद्देनज़र  रखते हुए अंग्रेजी की स्वीकार्यता तेजी से बड़ी है। और इसका पूरा दबाव हिंदी पर पड़ा है।  अगर सही मायने में देखे तो अंग्रेजी का इस्तेमाल आज के दौर में कुछ जरूरत भी और कुछ "स्टेटस सिम्बोल " भी है।  अंग्रेजी का ज्ञान रोजगार के साधन उपलब्ध करता है किन्तु हिंदी में अवसरों की कमी है। इसी कारणवश हिन्दी लगातार उपेक्षित है। और सही मायने में ये तर्क-संगत भी है। क्यों एक तो हिन्दी में रोजगार नहीं है और दूसरे तरफ अगर रोजगार मिल भी गया तो अपेक्षित वेतनमान की कम होता है।  ये हिन्दी से विमुखता का मुख्य कारण भी है। सभी आँकड़ों, तर्कों -वितर्को में एक पहलू जो भूल जाया जाता है वो ये है की हिन्दी हमारी मातृ-भाषा है और हमारी संस्कृति और सभ्यता की भाषा। अपने भावों को व्यक्त करने,अपने भावों को कलमबद्ध करने के लिए हिन्दी से बेहतर भाषा उपलब्ध नहीं।  हिन्दी का पतन हमारी सभ्यता और संस्कृति के पतन के अनुक्रमानुपाती है। सभ्यता का पतन हमारा
हिन्दी हिन्दुस्तान की धडकन में है

पतन है।  रिश्तों, मर्यादायों का पतन है। ये पतन शायद ही कोई भारतवासी सहर्ष स्वीकार पर पाए। हिन्दी का पतन देश का पतन है। क्यों की हम हिन्दुस्तान तभी तक है जब तक हिन्दी है। हिंदी का पतन अप्रत्क्ष तौर पर हमारे आर्थिक संतुलन का भी पतन है। अंग्रेजी की बढती हुई स्वीकार्यता के कारण ही शायद हम अपनी आत्म-निर्भरता एक हद तक खो चुके है।  वक़्त के साथ हम विदेशों पर ज्यादा ही निर्भर होते चले गए। इस संपूर्ण विचार-विमर्श का सार ये है कि अंग्रेजी पढो पर हिन्दी को कतई  मत भूलों २ भाषायों का संपूर्ण ज्ञान होना , केवल एक भाषा जान लेने से बेहतर है।  वैसे भी हिन्दी अत्यंत की मनमोहक भाषा भी है। हिन्दी है तो कविता है, हिन्दी है तो गीत है, हिन्दी है तो गज़ल है, हिन्दी है तो भजन है, हिन्दी है तो हिन्दुस्तान है। हिन्दी से जुड़ने और व्यापक प्रचार प्रसार करने का एक धार्मिक कारण है।  हिन्दुस्तान में ईश्वर से जुड़ना का माध्यम हिंदी ही मन जाता है। हिन्दी दिवस को केवल सरकारी औपचारिकता न मानते हुए कम से कम हर वर्ष इस दिन हिन्दी के प्रचार प्रसार की शुरुआत करनी चाहिए। रोजगार पाना एक पहलू है , राजभाषा के लिए सरकारी प्रयास दूसरा पहलू  और सबसे महत्त्वपूर्ण पहलू है हमारे आपके द्द्वारा हिन्दी को बढ़ावा देना।  ताकि हम युगों युगों तक ये कहने के हक़दार हो कि -

यूनान ,मिश्र,रोम सब मिटा गए जहाँ से। 
बाकी है मगर अब तक नामों निशाँ हमारा।।

कुछ बात तो है की मिटती नहीं हस्ती हमारी।
सदियों से रहा है दौरे जमाँ दुश्मन हमारा।।

क्वार्टर मास्टर अब्दुल हमीद: वीरगति दिवस पर एक श्रदांजलि, कुछ अन्य पहलू

कौन है अब्दुल हमीद?
क्वार्टर मास्टर अब्दुल हमीद 1965 के भारत -पकिस्तान युद्ध के दौरान अदम्य साहस और वीरता का प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तानी सीमा के पास खेम-करम सेक्टर में अजेय माने जाने वालें पैटन टैंक्स को मार गिराने और देश के लिए अपना बलिदान देने के लिए वीर अब्दुल हमीद को देश का सर्वोत्तम, सर्वोच्च वीरता पुरस्कार प्रदान किया है। वीरगति के उपरान्त १० दिन के भीतर यह पुरस्कार हमीद साहब को दिया गया। आपको याद दिल दूँ की उस दौरान देश में "लाल बहादुर शास्त्री जी की सरकार थी" और शायद यही कारण था की "अब्दुल हमीद" जी बिना विलम्ब के ये पुरस्कार दिया गया। ये गौरतलब है की उत्तर प्रदेश बोर्ड की पाठ्यपुस्तकों में "वीर अब्दुल हमीद" के बारे में एक समर्पित अध्याय है। शायद ये उनके महान बलिदान के प्रति एक सम्मान को दर्शाता है।

भारत की थल सेना द्वारा परमवीर-चक्र देते हुए ये उद्धरण दिया गया।
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The citation for the Param Vir Chakra awarded to him reads:
COMPANY QUARTER MASTER HAVILDAR ABDUL HAMID
4 GRENADIERS (NO 2639985)
At 0800 hours on 10 September 1965 Pakistan forces launched an attack with a regiment of Patton tanks on a vital area ahead of village Cheema on the Bhikkiwind road in the Khem Karam Sector. Intense artillery shelling preceded the attack. The enemy tanks penetrated the forward position by 0900 hours. Realising the grave situation, Company Quarter Master Havildar Abdul Hamid who was commander of an RCL gun detachment moved out to a flanking position with his gun mounted on a Jeep, under intense enemy shelling and tank fire. Taking an advantageous position, he knocked out the leading enemy tank and then swiftly changing his position, he sent another tank up in flames. By this time the enemy tanks in the area spotted him and brought his jeep under concentrated machine-gun and high explosive fire. Undeterred, Company Quarter Master Havildar Abdul Hamid kept on firing on yet another enemy tank with his recoilless gun. While doing so, he was mortally wounded by an enemy high explosive shell.
Havildar Abdul Hamid’s brave action inspired his comrades to put up a gallant fight and to beat back the heavy tank assault by the enemy. His complete disregard for his personal safety during the operation and his sustained acts of bravery in the face of constant enemy fire were a shining example not only to his unit but also to the whole division and were in the highest traditions of the Indian Army.

---------------------- साभार विकिपीडिया - अब्दुल हमीद ------------------------------------------
अब्दुल हमीद जी की विधवा "रसूलन बीबी" जीवित है और संघर्षरत है .
सन 2000 के आस-पास की बात है हिंदी दैनिक अख़बारों में एक खबर आम थी। रसूलन बीबी (हमीद साहब की विधवा ) अपने आर्थिक हालातों के चलते किसी मांग को लेकर सरकारी महकमों और उनके मुलाजिमों के दफ्तरों के चक्कर लगा रही थी।

2008- रसूलन  बीवी  तत्कालीन  राष्ट्रपति  प्रतिभा  देवी  पाटिल  जी के साथ

खबर बेहद दुखद थी।  क्यों कि यकीन नहीं होता था की जिन अब्दुल हमीद को हमने किताबों में पढा उनकी धर्म-पत्नी को अपने अधिकारों की लडाई के लिए सरकारी महकमों के अंतहीन चक्कर लगाने पड़ रहे थे। ये व्यवस्था और तंत्र के प्रति गहरा अविश्वास पैदा क़र देने के लिए बहुत, बहुत ज्यादा थी। ये जगजाहिर कि हम एक प्रतिकिया-वादी व्यवस्था का हिस्सा है, तात्पर्य ये है कि हमारी व्यवस्था कोई घटना /दुर्घटना के बाद जागती है और कोई भी कदम उठाती है।  ये जाहिर है की उठाये गए कदम पर्याप्त होगे ये जरूरी नहीं है।
पर ऐसा ही व्यवहार देश के शहीदों के साथ होगा/होता है इस बात का इल्म न था!!!
यही दोबारा 2008 में हुआ जब रसूलन बीबी को अब्दुल हमीद के स्मारक का पुनरुद्धार करने के लिए देश की तत्कालीन राष्ट्रपति से गुहार लगनी पड़ी।  और ये फिर हुआ २०१२ में जब रसूलन बीबी अपने एक नाती के साथ उत्तर-प्रदेश विधानसभा बहार धरना देना पड़ा।  हालाँकि प्रदेश सरकार ने उनकी बात सुनी और मानी भी , सम्मान भी दिया किन्तु ९५ साल की विधवा को प्रदर्शन के लिए मजबूत करना क्यों? देशहित में बलिदान देने वालें का परिवार इससे कहीं बेहतर व्यवहार पाने का अधिकारी है।  ये जगजाहिर है की जो देश/सभ्यता अपने शहीदों का सम्मान नहीं करता उसके गौरवशाली अतीत को अतीत बनने में ज्यादा समय नहीं लगता।